Wednesday, March 17, 2010

SMS 48

यहाँ खामोश नज़रों का नज़ारा कोन बनता है
बोहत गहरे समन्दर का किनारा कोन बनता है
चलो हम देखते हें अब खुद को बर्बाद कर के भी
हमारी ब्रबदियों में भी हमारा कोन बनता है.

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