यहाँ खामोश नज़रों का नज़ारा कोन बनता हैबोहत गहरे समन्दर का किनारा कोन बनता हैचलो हम देखते हें अब खुद को बर्बाद कर के भीहमारी ब्रबदियों में भी हमारा कोन बनता है.
Posted by TPM SUTRA at 3:14 AM
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